दिव्य चिंतन
जब मन चाहा__विधायकों ने दल बदला और मतदाताओं के सिर पर नारियल फोड़ कर पानी पी लिया___
__निजी स्वार्थ, भ्रष्टाचार, अहंकार की कीमत मतदाता क्यों चुकाएं ?
भ्रष्ट कांग्रेस के भ्रष्ट नेताओं के प्रवेश से भाजपा के परचम की ऊंचाई घटती जा रही है__ और नाड़े की लंबाई बढ़ रही है___
हरीश मिश्र
विधानसभा चुनाव के समय कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के वचन पत्र को साक्षी मानकर___ छाती ठोक कर__ मतदाताओं के हित में वचन निभाने की बात कर रहे थे___यह वचन नहीं__ वचन पत्र है___और इस वचन पत्र में लिखे काले अक्षर शिव सरकार के काले तंत्र का समापन करेगा___हुआ भी यही___शिव की तीन कालखंडों की कथा का अंत हुआ__और कमलनाथ का उदय___ तीनों को जनता की सेवा करनी थी ।
जब महाराज की महत्वाकांक्षा राजघराने की दीवारों में दम तोड़ने लगी___तब राजघराने से निकले महाराज ने अपने निजी हित के लिए वैश्विक बीमारी के समय कमलनाथ सरकार को संकट में डाल दिया___ निजी स्वार्थ, अहंकार और सत्ता की प्यास के अलावा कौन सा मुद्दा था, कि सिंधिया कमलनाथ की छाती में कील ठोक कर भाजपा में आ गए___कील नहीं__कीला___ कीला दो-तीन इंच का नहीं 22 इंच का ! ___कुछ जंग लगी कीलें___यह कीलें कामलनाथ की छाती में नहीं___ मतदाताओं की छाती में ठोंकी हैं महाराज ।
महाराज ! तकदीर और तस्वीर बदलने आए थे___ जब तकदीर नहीं बदली___ तो होली की अमावस्या की रात में नरों में उत्तम पुरुष नरोत्तम के सानिध्य में___ मां बगलामुखी की साधना कर___ शिव की आराधना कर__ राजनीति के धूर्त तांत्रिक दिग्विजय से बदला लेने के लिए___
कमलनाथ के कपाल को सड़क पर फेंक दिया___कपाल फटा नहीं__कारण असमय मृत्यु हुई___
इसलिए कांग्रेस की प्रेत आत्माएं आज भी राजनैतिक तांत्रिक क्रियाओं में संलग्न है__
कोरोनावायरस महा संकट के समय जब मजदूरों, गरीबों, व्यापारियों, किसानों को राहत देना थी__तब विधायक कर्नाटक के रिसोर्ट में जान के खतरे के नाटक का मंचन कर रहे थे___सरकार गिरी__ खतरा टला___जिन विधायकों की जान का खतरा था___उन विधायकों ने 22 सीटों पर चुनाव का नारियल जनता के सिर पर फोड़ दिया और प्रसाद अपने परिवार में वितरित कर दिया।
आज़ादी के बाद से मतदाताओं की
खोपड़ी को राजनीतिक तांत्रिक बहुत मजबूत समझते हैं___ जब मन चाहा__विधायकों ने दल बदला और मतदाताओं के सिर पर नारियल फोड़ कर पानी पी लिया___मतदाता कभी भी विरोध नहीं करता___जैसे उसने अपनी खोपड़ी विधायकों के चरणों में गिरवी रख रखी हो___गिरवी नहीं होती तो मतदाता प्रश्न करते
___निजी स्वार्थ, भ्रष्टाचार, अहंकार की कीमत मतदाता क्यों चुकाएं ?
सत्ता परिवर्तन कर भाजपा जिसे अपनी जीत समझ रही है__ वह जीत नहीं___हार है___1980 से 2017 तक अटल गगन में भाजपा के परचम की ऊंचाई लगातार बढी़___किंतु 2017 के बाद अधिकतर राज्यों में सरकार बनाने के लालच में___ भ्रष्ट कांग्रेस के भ्रष्ट नेताओं के प्रवेश से भाजपा के परचम की ऊंचाई घटती जा रही है__ और नाड़े की लंबाई बढ़ रही है___मोदी जी ! देश के करोड़ों लोग आपके राष्ट्रवाद का समर्थन करते हैं, जोड़-तोड़ का नहीं___
म प्र में सत्ता का अपहरण हुआ है__जब गरीब रेल की पटरी पर दो रोटी के लिए बेमौत मर रहा है____सडकों पर रौंदा जा रहा है__तब शिव अपनी मंत्रिमंडल ( बरात ) गठित करने में लगे हैं__सत्ता की तासीर तामसी और रूप- रंग- भदरंग होता है___जब शिव को चौथी बार सत्ता मिली____तो शिव के गण जय-जय कार करने लगे__ शिव ने कांग्रेस की मुरझाई तुलसी की सिलवटों वाली माला पहन ली___गोविंद अभिषेक करने लगे___ बिसाऊ चरणों में___ तो
प्रभु राम गले पड़ गए___एंदलसिंह गला कसने लगे___हरदीप का बुझा दीप भाजपा के तेल से जलेगा___मुन्ना रोएगा___कमलेश कलेश करेगा__सरदार का दिमाग चलेगा___धाकड़ भी धीमी आंच पर बाटी सेकेगा___शिव के गले में 22 नर मुंडो की माला है___वेश अशुभ है, तो कंठ पर कल्याण के स्वर___विष्णु, भगत,आशुतोष, रामपाल, शिव बारात की तैयारी कर रहे हैं__ बारात निकलेगी तो बारात में महाराज के भांगेरी भी आएंगे___महाराज के दरबार में कोई बिना मुख का है___किसी के बहुत से मुख हैं___किसी की बहुत आंखें हैं__किसी की आंखें भी नहीं है___कोई मोटा तो__ कोई पतला____कोई पवित्र है__ तो कोई अपवित्र____कोई शिक्षित है___ कोई अशिक्षित_____किसी के हाथ में लोकतंत्र का कपाल है____तो कोई धर्मनिरपेक्ष___राम को काल्पनिक मानने वाले हैं___ धारा 370 हटाने के विरोध हैं ___ तीन तलाक कानून के विरोध है____ नागरिकता कानून की आड़ में देश जला रहे थे__जो उनको रसद पहुंचा रहे थे___वह शिव की बारात में आकर भाजपा के भगत हो जाएंगे ___तुलसीदास जी ने लिखा है "जस दूल्हा तस बनी बराता___अर्थात लोकतंत्र में शिव की बारात में जैसे शिव हैं__वैसे ही बराती आ रहे हैं___
इससे ज्यादा कलंकित स्वरूप भाजपा का नहीं हो सकता___अभी तो छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड से मतदाताओं ने मुक्ति दी है___ यदि ऐसे ही भाजपा के परचम को नीचा करते रहे और नाड़े की लंबाई बढ़ाते रहें___ तो निश्चित मानना एक दिन भाजपा के हाथ में नाड़ा ही रह जाएगा।
अभी भी समय है__ भाजपा के अनुशासित कार्यकर्ताओं के सम्मान देने का__ मोदी के भक्त और राष्ट्रवाद के पुजारियों से मन की बात पूछने का ।