एनकाउंटर कभी न्याय की जगह नहीं ले सकता

 


 


एनकाउंटर कभी न्याय की जगह नहीं ले सकता


 मुकन्द हरि


एनकाउंटर कभी न्याय की जगह नहीं ले सकता लेकिन जब न्यायिक प्रणाली ही इतनी सुस्त हो तो कभी-कभी ऐसी घटनाएं लोगों को फौरी राहत सी मालूम पड़ती हैं। 


ये खुशी नहीं बल्कि दुःख की बात है कि बलात्कार, हत्या जैसे जघन्य अपराधों के कु-कर्मियों को हमारे न्यायालय त्वरित सजा न दे पाते हैं। 


इन अपराधियों को दया याचिका तक देने का अधिकार है और लोग कब तक मिलेगी सजा और पीड़ित परिवार कब तक मिलेगा न्याय, ये बस सोचते ही रह जाते हैं।


ऐसी स्थिति में अगर चारों अपराधी पुलिस से हथियार छीनकर भाग रहे थे और पुलिस ने उनका एनकाउंटर किया तो इसे ऐसे ही स्वीकार करना चाहिए लेकिन ये घटना प्रवृत्ति नहीं बननी चाहिए।


अगर प्रवृत्ति बननी चाहिए तो ऐसे अपराधों में त्वरित और कठोरतम न्याय की बननी चाहिए। इसके लिए पहल जरूरी है।